सरकार के कार्यकारी अंग में प्रधान मंत्री, मंत्री और नौकरशाही नामक एक बड़ा संगठन शामिल होता है। इस मशीनरी और सैन्य सेवा के बीच के अंतर को रेखांकित करने के लिए, इसे सिविल सेवा के रूप में वर्णित किया जाता है। सरकार के स्थायी कर्मचारियों के रूप में काम करने वाले प्रशिक्षित और कुशल अधिकारियों को नीतियां बनाने और इन नीतियों को लागू करने में मंत्रियों की सहायता करने का काम सौंपा जाता है। एक लोकतंत्र में, निर्वाचित प्रतिनिधि और मंत्री सरकार के प्रभारी होते हैं और प्रशासन उनके नियंत्रण और पर्यवेक्षण के अधीन होता है। संसदीय प्रणाली में, विधायिका प्रशासन पर भी नियंत्रण रखती है।
प्रशासनिक अधिकारी विधायिका द्वारा अपनाई गई नीतियों के उल्लंघन में कार्य नहीं कर सकते। प्रशासन पर राजनीतिक नियंत्रण बनाए रखना मंत्रियों की जिम्मेदारी है। भारत ने पेशेवर प्रशासनिक तंत्र स्थापित किया है। साथ ही इस मशीनरी को राजनीतिक रूप से जवाबदेह बनाया जाता है। नौकरशाही के भी राजनीतिक रूप से तटस्थ रहने की उम्मीद है। अर्थात नौकरशाही नीतिगत मामलों पर कोई राजनीतिक रुख नहीं अपनाएगी। लोकतंत्र में यह हमेशा संभव है कि चुनाव में एक पार्टी की हार हो और नई सरकार पिछली सरकार की नीतियों के स्थान पर नई नीतियों को चुनना चाहती है। ऐसी स्थिति में, यह प्रशासनिक तंत्र का दायित्व है कि वह नीति का मसौदा तैयार करने और उसके कार्यान्वयन में ईमानदारी और कुशलता से भाग ले।
भारतीय नौकरशाही एक बहुत ही जटिल प्रणाली है। इसमें अखिल भारतीय सेवाएं, राज्य सेवाएं, स्थानीय सरकारों के कर्मचारी और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को चलाने वाले तकनीकी और प्रबंधकीय कर्मचारी शामिल हैं। हमारे संविधान के निर्माता निष्पक्ष और पेशेवर नौकरशाही के महत्व से अवगत थे। वे यह भी चाहते थे कि सिविल सेवा या नौकरशाही के सदस्यों को योग्यता के आधार पर निष्पक्ष रूप से चुना जाए। इसलिए, संघ लोक सेवा आयोग को भारत सरकार के लिए सिविल सेवकों की भर्ती की प्रक्रिया के संचालन का कार्य सौंपा गया है। इसी तरह के लोक सेवा आयोग राज्यों के लिए भी प्रदान किए जाते हैं। लोक सेवा आयोगों के सदस्यों की नियुक्ति एक निश्चित अवधि के लिए की जाती है। उनका निष्कासन या निलंबन सर्वोच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश द्वारा की गई गहन जांच के अधीन है। दक्षता और योग्यता भर्ती के मानदंड हैं| संविधान यह भी सुनिश्चित करता है कि कमजोर वर्गों सहित समाज के सभी वर्गों को सार्वजनिक नौकरशाही का हिस्सा बनने का अवसर मिले। इस उद्देश्य के लिए, संविधान ने दलितों और आदिवासियों के लिए नौकरियों में आरक्षण का प्रावधान किया है। इसके बाद अन्य पिछड़े वर्गों, अन्य पिछड़े वर्ग की महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए भी आरक्षण प्रदान किया गया है। ये प्रावधान सुनिश्चित करते हैं कि नौकरशाही अधिक प्रतिनिधिक होगी और सामाजिक असमानताएं सिविल सेवा में भर्ती के रास्ते में नहीं आएंगी।
भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय पुलिस सेवा के लिए यूपीएससी द्वारा चुने गए व्यक्ति राज्यों में उच्च स्तरीय नौकरशाही की रीढ़ हैं। एक आईएएस या आईपीएस अधिकारी को एक विशेष राज्य को सौंपा जाता है, जहां वह राज्य सरकार की देखरेख में काम करता है। हालांकि, आईएएस या आईपीएस अधिकारी केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं, वे केंद्र सरकार की सेवा में वापस जा सकते हैं और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल केंद्र सरकार ही उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकती है। इसका मतलब है कि राज्यों के प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी केंद्र सरकार के पर्यवेक्षण और नियंत्रण में हैं। यूपीएससी द्वारा नियुक्त आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के अलावा, राज्य का प्रशासन राज्य लोक सेवा आयोगों के माध्यम से नियुक्त अधिकारियों द्वारा देखा जाता है। नौकरशाही की यह विशेषता राज्यों के प्रशासन पर केंद्र सरकार के नियंत्रण को मजबूत करती है।
नौकरशाही एक ऐसा साधन है जिसके माध्यम से सरकार की कल्याणकारी नीतियां लोगों तक पहुंचनी चाहिए। लेकिन अक्सर यह इतना शक्तिशाली होता है कि लोग सरकारी अधिकारी के पास जाने से डरते हैं। यह लोगों का एक सामान्य अनुभव है कि नौकरशाही आम नागरिक की मांगों और अपेक्षाओं के प्रति असंवेदनशील है। केवल अगर लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई सरकार नौकरशाही को नियंत्रित करती है, तो इनमें से कुछ समस्याओं से प्रभावी ढंग से निपटा जा सकता है। दूसरी ओर, बहुत अधिक राजनीतिक हस्तक्षेप नौकरशाही को राजनेता के हाथ में एक उपकरण में बदल देता है। संविधान में भर्ती के लिए स्वतंत्र तंत्र का प्रावधान है| कई आलोचक मानते हैं कि सिविल सेवकों को उनके कर्तव्यों के प्रदर्शन में राजनीतिक हस्तक्षेप से बचाने का कोई प्रावधान नहीं है। साथ ही नौकरशाही की नागरिकों के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त प्रावधान नहीं हैं। सूचना का अधिकार जैसे उपाय नौकरशाही को थोड़ा और जवाबदेह बना सकते हैं।
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General Studies (44Q) Total Question - 44This test is specially designed for UPSC and BPSC aspirants to build a strong foundation in basic science through NCERT. Based on Class 9 Science, Chapter 2 – Cell – The Building Block of Life, it covers fundamental concepts. The questions are framed in a UPSC/BPSC prelims-oriented pattern, focusing on conceptual clarity, analytical thinking, and the application of scientific principles. This test will help aspirants strengthen their NCERT fundamentals and improve their ability to tackle tricky science questions in competitive examinations.